Friday, 30 July 2021, 3:12 PM

उपदेश

लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी

Updated on 30 July, 2021, 6:45
राइट बंधुओं ने पहली बार 9 नव बर, 1904 को 5 मिनट से ज्यादा देर तक हवा में उड़ान भरी थी। हवाई जहाज का आविष्कार करने वाले ऑॢवल और विल्बर राइट बचपन से ही कल्पनाशील थे। दोनों ने कल्पनाओं की उड़ान में हवाई जहाज बनाने का सपना देखना शुरू कर... Read More

साधना और सुविधा

Updated on 30 July, 2021, 6:00
आसक्ति के पथ पर आगे बढ़ने वाले अपनी आकांक्षाओं को विस्तार देते हैं। उनकी इच्छाओं का इतना विस्तार हो जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं है। उस विस्तार में व्यक्ति का अस्तित्व विलीन हो जाता है। फिर वह अपने लिए नहीं जीता। उसके जीवन का आधार पदार्थ बन जाता... Read More

अंग्रेज़ी सत्ता और नैतिकता

Updated on 26 July, 2021, 6:00
सत्ता के संचालन में शक्ति की अपेक्षा रहती है या नहीं, यह एक बड़ा प्रश्न है। शक्ति दो प्रकार की होती है- नैतिक शक्ति और उपकरण शक्ति। नैतिक शक्ति के बिना तो व्यक्ति सही ढंग से प्रशासन कर ही नहीं सकता। उपकरण शक्ति का जहां तक प्रश्न है, एक सीमा... Read More

इच्छाओं को समर्पित करते जाओ 

Updated on 25 July, 2021, 6:00
सभी इच्छाएं खुशी के लिए होती हैं। इच्छाओं का लक्ष्य ही यही है। किंतु इच्छा आपको कितनी बार लक्ष्य तक पहुंचाती है? इच्छा तुम्हें आनंद की ओर ले जाने का आभास देती है, वास्तव में वह ऐसा कर ही नहीं सकती। इसीलिए इसे माया कहते हैं। इच्छा कैसे पैदा होती... Read More

नर या नारायण कौन थे 'राम' 

Updated on 23 July, 2021, 6:00
श्रीराम पूर्णत? ईश्वर हैं। भगवान हैं। साथ ही पूर्ण मानव भी हैं। उनके लीला चरित्र में जहां एक ओर ईश्वरत्व का वैचित्रमय लीला विन्यास है, वहीं दूसरी ओर मानवता का प्रकाश भी है। विश्वव्यापिनी विशाल यशकीर्ति के साथ सम्यक निरभिमानिता है। वज्रवत न्याय कठोरता के साथ पुष्यवत प्रेमकोमलता है। अनंत... Read More

दिव्यता की विविधता

Updated on 20 July, 2021, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... Read More

गुरु की स्वीकार्यता

Updated on 19 July, 2021, 6:00
हर वक्त संसार को गुरु की दृष्टि से देखो। तब यह संसार मलिन नहीं बल्कि प्रेम, आनन्द, सहयोगिता, दया आदि गुणों से परिपूर्ण, अधिक उत्सवपूर्ण लगेगा। तुम्हें किसी के साथ संबंध बनाने में भय नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे पास आश्रय है। घर के अन्दर से तुम बाहर के वज्रपात, आंधी,... Read More

सतोगुण और तमोगुण का फर्प 

Updated on 18 July, 2021, 6:00
सतोगुण में ज्ञान के विकास से मनुष्य यह जान सकता है कि कौन क्या है, लेकिन तमोगुण तो इसके सर्वधा विपरीत होता है। जो भी तमोगुण के फेर में पड़ता है, वह पागल हो जाता है और पागल पुरुष यह नहीं समझ पाता कि कौन क्या है! वह प्रगति करने... Read More

प्रयत्न में ऊब नहीं 

Updated on 17 July, 2021, 6:00
संसार में गति के जो नियम हैं, परमात्मा में गति के ठीक उनसे उलटे नियम काम आते हैं और यहीं बड़ी मुश्किल हो जाती है।   संसार में ऊबना बाद में आता है, प्रयत्न में ऊब नहीं आती। इसलिए संसार में लोग गति करते चले जाते हैं। पर परमात्मा में प्रयत्न... Read More

 भगवान की विचारणाएं

Updated on 11 July, 2021, 6:00
जब मनुष्य इस जिम्मेदारी को समझ ले कि मैं क्यों पैदा हुआ हूं और पैदा हुआ हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? भगवान द्वारा सोचना, विचारना, बोलना, भावनाएं आदि अमानतें मनुष्य को इसलिए नहीं दी गई हैं कि उनके द्वारा वह सुख-सुविधाएं या विलासिता के साधन जुटा अपना अहंकार पूरा... Read More

प्रार्थना की पुकार 

Updated on 10 July, 2021, 7:00
यदि प्रार्थना सच्ची हो तो परमपिता परमेश्वर उस प्रार्थना को जरूर ही सुनते हैं। परमपिता परमेश्वर अत्यंत कृपालु और दयालु हैं, परंतु प्रार्थना के लिए भी हृदय का पवित्र और निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है। मन का पवित्र होना, अहंकार और अभिमान से रहित होना नितांत आवश्यक है। ऐसे पवित्र-हृदय-अंत:... Read More

 विवेक ही धर्म है   

Updated on 9 July, 2021, 6:00
युग के आदि में मनुष्य भी जंगली था। जब से मनुष्य ने विकास करना शुरू किया, उसकी आवश्यकताएं बढ़ गई। आवश्यकताओं की पूर्ति न होने से समस्या ने जन्म लिया।समस्या सामने आई तब समाधान की बात सोची गई। समाधान के स्तर दो थे- पदार्थ-जगत, मनो-जगत. प्रथम स्तर पर पदाथरे के... Read More

जीवन और मृत्यु

Updated on 7 July, 2021, 6:00
चीन में लाओत्से के समय में ऐसी प्रचलित धारण थी कि आदमी के शरीर में नौ छेद होते हैं। उन्हीं नौ छेदों से जीवन प्रवेश करता है और उन्हीं से बाहर निकलता है। दो आंखें, दो नाक के छेद, मुंह, दो कान, जननेंद्रिय, गुदा। इसके साथ चार अंग हैं- दो... Read More

आशा निराशा

Updated on 28 June, 2021, 6:00
एक मछुआरा था । उस दिन सुबह से शाम तक नदी में जाल डालकर मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करता रहा , लेकिन एक भी मछली जाल में न फँसी।  जैसे -जैसे सूरज डूबने लगा, उसकी निराशा गहरी होती गयी । भगवान का नाम लेकर उसने एक बार और जाल डाला... Read More

बदला हुआ आदमी

Updated on 26 June, 2021, 6:00
स्कॉटलैंड के एक राजा को शत्रुओं ने पराजित कर दिया। उसे धन-जन की बड़ी हानि हुई और संगी-साथी भी छूट गए। अब बस उसका जीवन बचा था, पर शत्रु उसकी टोह में थे। प्राण बचाने के लिए वह भागा-भागा फिर रहा था। स्थिति यह थी कि राजा अब मरा कि... Read More

ध्यान-तन्मयता का नाम समाधि

Updated on 23 June, 2021, 6:00
आस्था का निर्माण हुए बिना ध्यान में जाने की क्षमता अर्जित नहीं हो सकती। कुछ व्यक्तिियों में नैसर्गिक आस्था होती है और कुछ व्यक्तिियों की आस्था का निर्माण करना पड़ता है। आस्था पर संकल्प का पुट लग जाए और अनवरत अभ्यास का प्रम चलता रहे तो आगे बढ़ने का मार्ग... Read More

धर्म का मूल केंद्र है वर्तमान

Updated on 14 June, 2021, 6:00
धर्म जगत ने धर्म को केवल परलोक के साथ जोड़कर भारी भूल की है। इसका परिणाम यह हुआ कि धर्म का असली प्रयोजन तिरोहित हो गया। वह स्वर्ग-सुखों के प्रलोभन और नरक-दुख के भय से जुड़ गया। हर धर्म-प्रवर्तक ने धर्म को जीवन से जोड़ा, किंतु धर्म-परंपराओं ने उसे स्वर्ग... Read More

वरुथिनी एकादशी के दिन हुआ था संत वल्लभाचार्य का जन्म

Updated on 4 May, 2021, 10:55
वैशाख कृष्ण की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को विधिपूर्वक व्रत करने से जीवन में मृत्यु समान दुखों से मुक्ति मिलती है। सन् 1479 में इसी एकादशी के दिन भक्ति परम्परा के महान संत वल्लभाचार्य का जन्म हुआ था। इन्हें 'वैश्वानरावतार' यानी अग्नि... Read More

जो धन गलत कामों से कमाया जाता है, वह घर-परिवार में अशांति बढ़ा देता है

Updated on 2 May, 2021, 11:09
कहानी - देवी लक्ष्मी से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। पुराने समय में महालक्ष्मी ने यह तय किया था कि वे असुरों के पास भी रहेंगी। इस बात से सभी देवता चिंतित थे। देवता आपस में इस बात की चर्चा करते थे कि देवी लक्ष्मी ने ये ठीक नहीं किया... Read More

जो लोग अपने जीवन से संतुष्ट हैं, वे बुरे समय में भी शांत और प्रसन्न रहते हैं

Updated on 2 May, 2021, 11:03
एक धनवान सेठ के पास सुख-सुविधा की हर एक चीज थी। परिवार में भी सब कुछ अच्छा था, लेकिन उसके जीवन में शांति नहीं थी। एक दिन वह व्यापार के लिए एक जंगल में से गुजर रहा था। जंगल में सेठ को एक आश्रम दिखाई दिया। वहां एक संत टूटी झोपड़ी... Read More

असफल होने पर न छोड़ें हिम्मत, नए साहस और उत्साह से जीतें जंग

Updated on 30 April, 2021, 6:15
संगीतकार गाल्फर्ड के पास उसकी एक शिष्या अपने मन की व्यथा कहने गई कि वह कुरूप होने के कारण संगीत मंच पर जाते ही यह सोचने लगती है कि दूसरी आकर्षक लड़कियों की तुलना में उसे दर्शक नापसंद करेंगे और हंसी उड़ाएंगे। यह विचार आते ही वह सकपका जाती है... Read More

हमेशा दें अच्छाई पर ध्यान

Updated on 17 March, 2021, 6:30
एक किसान रोज सुबह उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था। उनमें से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा सही था। इस वजह से रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़... Read More

हमेशा जिंदा रखें अपने अंदर का जज़बा, सपनों को मिलेगी उड़ान

Updated on 24 February, 2021, 6:15
अवधी होनहार छात्रा थी। सी.सै. स्कूल की फाइनल वर्ष की विद्यार्थी थी। डाक्टर बनने का सपना था। माता-पिता के साथ भरतपुर जा रही थी। धीमी गति से जैसे ही रेलगाड़ी स्टेशन से चली, छटपटाहट में गाड़ी चढ़ने लगी कि पैर फिसल गया। बच गई लेकिन दोनों टागें कट गईं। माता-पिता पर... Read More

शरीर तो मंदिर है

Updated on 22 February, 2021, 6:00
आस्तिकता और कर्त्तव्यपरायणता की सद्वृत्ति का प्रभाव सबसे पहले सबसे समीपवर्ती स्वजन पर पड़ना चाहिए। हमारा सबसे निकटवर्ती सम्बन्धी हमारा शरीर हैं। उसके साथ सद्व्यवहार करना, उसे स्वस्थ और सुरक्षित रखना अत्यावश्यक है। शरीर को नर कहकर उसकी उपेक्षा करना अथवा उसे सजाने-संवारने में सारी शक्ति खर्च कर देना, दोनों... Read More

उत्तम शरण है धर्म  

Updated on 17 February, 2021, 6:30
धर्म के बारे में भिन्न-भिन्न अवधारणाएं हैं। कुछ जीवन के लिए धर्म की अनिवार्यता को स्वीकार करते हैं। कुछ लोगों का अभिमत है कि धर्म ढकोसला है। वह आदमी को पंगु बनाता है और रूढ़ धारणाओं के घेरे में बंदी बना लेता है। शायद इन्हीं अवधारणाओं के आधार पर किसी... Read More

खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानकर अहंकार न करें

Updated on 16 February, 2021, 6:00
ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने सभी जीवों में एक समान रक्त का संचार किया। इसलिए मनुष्य हो अथवा पशु सभी के शरीर में बह रहा खून का रंग लाल है। विभिन्न योनियों की रचना भी इसलिए की ताकि मनुष्य कभी इस बात का अहंकार न करें... Read More

भक्तों की सहायता करते हैं ईश्वर

Updated on 15 February, 2021, 6:15
ईश्वर को हम भले ही न देख पाएं लेकिन ईश्वर हर क्षण हमें देख रहा होता है। उसकी दृष्टि हमेशा अपने भक्तों एवं सद्व्यक्तियों पर रहती है। अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि जीवन में कभी न कभी कठिन समय में ईश्वर स्वयं आकर आपकी सहायता कर चुके हैं।... Read More

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम खुद हैं

Updated on 29 January, 2021, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... Read More

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम स्वंय हैं

Updated on 24 January, 2021, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... Read More

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज 

Updated on 18 January, 2021, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ। जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... Read More